डेटा और गोपनीयता: भारत (2026)
भारत में एक व्यापक, बहु-क्षेत्रीय डेटा संरक्षण कानून लागू है: डीपीडीपी अधिनियम 2023, जिसके कार्यान्वयन नियम 13–14 नवंबर 2025 को अधिसूचित किए गए, जिससे इसका चरणबद्ध कार्यान्वयन शुरू हुआ। कुछ प्रावधान (डेटा संरक्षण बोर्ड, परिभाषाएँ) अधिसूचना के तुरंत बाद लागू हो गए; सहमति-प्रबंधक और चयनित परिचालन कर्तव्य 13 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगे; अधिकतर वास्तविक दायित्व (डेटा-विश्वासपात्र कर्तव्य, डेटा-मुख्य अधिकार, उल्लंघन सूचना, दंड) 13 मई 2027 को पूरी तरह से प्रवर्तनीय हो जाएंगे। यह व्यवस्था आईटी अधिनियम 2000 के तहत पूर्व के संकीर्ण धारा 43A / SPDI नियम 2011 के ढांचे को प्रतिस्थापित करती है और प्रति उल्लंघन ₹250 करोड़ तक का मौद्रिक दंड लगाने की शक्ति के साथ एक केंद्रीय डिजिटल नियामक (DPB) की स्थापना करती है।
प्राथमिक ढांचा
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (DPDP अधिनियम) के साथ डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 को लागू करते हुए (13-14 नवंबर 2025 को अधिसूचित); इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रशासित और भारत के डेटा संरक्षण बोर्ड (DPB) द्वारा प्रवर्तित।
मुख्य बिंदु
प्राथमिक कानून और कार्यान्वयन नियम
डीपीडीपी अधिनियम, 2023 को 11 अगस्त 2023 को अधिनियमित किया गया था और इसके सहायक डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 को MeitY द्वारा 13-14 नवंबर 2025 को राजपत्र/प्रेस सूचना ब्यूरो के माध्यम से आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया गया था, जिससे अधिनियम को चरणबद्ध कार्यक्रम पर कार्यान्वित किया गया। (14 नवंबर 2025 / 14 नवंबर 2026 / 14 मई 2027).
नियंत्रक प्राधिकरण — भारत का डेटा संरक्षण बोर्ड
DPB एक वैधानिक, डिजिटल-प्रथम नियामक (चार सदस्य) है, जिसे DPDP अधिनियम के अध्याय V के तहत स्थापित किया गया है। यह नागरिक शिकायतें प्राप्त करता है, उल्लंघनों की जांच करता है, और मौद्रिक दंड लगा सकता है; अपीलें दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) में की जाती हैं। MeitY नीति निर्धारित करता है जबकि DPB निर्णय सुनाता है।
डेटा-प्रमुख अधिकार
व्यक्तियों ('डेटा प्रमुख') को सूचना प्राप्त करने, पहुँच (व्यक्तिगत डेटा का सारांश और साझाकरण विवरण), सुधार/पूर्ति/मिटाने, शिकायत निवारण, और किसी अन्य व्यक्ति को नामित करने का अधिकार है; सहमति स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना शर्त और स्पष्ट होनी चाहिए, और सहमति वापस लेना उतना ही आसान होना चाहिए जितना इसे देना।
डेटा-विश्वासदायित्व और महत्वपूर्ण डेटा विश्वासपालक
डेटा फिड्यूशियरीज़ को उद्देश्य सीमा, सटीकता, उचित सुरक्षा उपाय, डीपीबी और प्रभावित अभिभावकों को उल्लंघन की सूचना, और बच्चों के डेटा संरक्षण (सत्यापनीय अभिभावकीय सहमति; नाबालिगों पर ट्रैकिंग/लक्षित विज्ञापनों पर प्रतिबंध) सुनिश्चित करना चाहिए। केंद्रीय सरकार कुछ संस्थाओं को 'महत्वपूर्ण डेटा न्यासी' (धारा 10) के रूप में नामित कर सकती है, जिन पर अतिरिक्त दायित्व होंगे: भारत में स्थित एक डेटा संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति, एक स्वतंत्र डेटा ऑडिटर, और आवधिक डीपीआईए।
सीमा-पार डेटा हस्तांतरण
अधिनियम की धारा 16 और 2025 नियमों के नियम 15 के तहत, व्यक्तिगत डेटा को डिफ़ॉल्ट रूप से भारत के बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है, सिवाय उन देशों या व्यक्तियों के वर्गों के जिन्हें केंद्रीय सरकार की अधिसूचना द्वारा विशेष रूप से प्रतिबंधित किया गया है ('ब्लैकलिस्ट' / नकारात्मक-सूची दृष्टिकोण)। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र-विशिष्ट हस्तांतरण प्रतिबंध (जैसे आरबीआई भुगतान-डेटा स्थानीयकरण) भी लागू रहते हैं।
दंड
अधिनियम की अनुसूची में डीपीबी द्वारा निर्धारित नागरिक मौद्रिक दंड निर्धारित किए गए हैं, जिसमें उल्लंघन होने पर उचित सुरक्षा उपाय न अपनाने के लिए ₹250 करोड़ की अधिकतम सीमा, उल्लंघन-सूचना में विफलता या बच्चों के डेटा दायित्वों के उल्लंघन के लिए ₹200 करोड़ तक का दंड शामिल है, और ₹150 करोड़ एसडीएफ-विशिष्ट चूकों के लिए। दंड भारत के समेकित कोष में देय हैं और इनमें व्यक्तिगत मुआवजा शामिल नहीं है।
यह पृष्ठ सुविधा के लिए अनुवादित है; अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक है और यह कानूनी सलाह नहीं है।